पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने जमीनी स्तर पर सक्रियता और तेज कर दी है। विशेष रूप से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग लगातार अभियान चला रहा है,जिसका असर अब दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.शिव मोहन शुक्ला के निर्देशन में तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के जिला कार्यक्रम प्रबंधक राजीव रावत के नेतृत्व में विकासखंड थलीसैण के उन संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष गृह भ्रमण अभियान चलाया गया,जहां अब भी गृह प्रसव की संख्या अधिक पाई जा रही है। इस अभियान के तहत त्रिपालीसैण,बगेली उपकेंद्र के अंतर्गत डूंगरी तल्ली,रिस्ती,रिखोली,कुंडील,कुचोली, ईडा नौगांव और चौरा जैसे दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य टीम ने घर-घर पहुंचकर गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति का आंकलन किया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थलीसैण से पहुंची स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.अंकिता रावत एवं डॉ.पूजा पाटिल की टीम द्वारा कुल 38 गर्भवती महिलाओं की एएनसी (गर्भावस्था पूर्व जांच) की गई,जिससे महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकीं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.शिव मोहन शुक्ला ने बताया कि इस दौरान 28 गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड पहले से कराए जा चुके थे,जबकि शेष 10 महिलाओं को खुशियों की सवारी 102 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थलीसैण बुलाकर निशुल्क अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए 102 सेवा के जिला समन्वयक को आवश्यक निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों एवं एएनएम को निर्देशित किया गया है कि वे प्रतिदिन गर्भवती महिलाओं का फॉलोअप सुनिश्चित करें,ताकि किसी भी प्रकार की जटिलता को समय रहते पहचाना और उपचारित किया जा सके। जिला कार्यक्रम प्रबंधक राजीव रावत ने बताया कि इस गृह भ्रमण अभियान के दौरान गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों को संस्थागत प्रसव के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही मातृत्व सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी देकर उन्हें लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया। इस महत्वपूर्ण अभियान में एएनएम माया रावत,जिला डाटा मैनेजर मनीष भट्ट,मनमोहन देवली,रविकांत उनियाल, दीपा भंडारी और रेखा सहित स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम सक्रिय रूप से मौजूद रही। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल न केवल मातृ मृत्यु दर को कम करने की दिशा में एक सशक्त कदम है,बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को सुनिश्चित करने का भी सशक्त उदाहरण बन रही है। यदि इसी प्रकार प्रयास जारी रहे,तो आने वाले समय में संस्थागत प्रसव की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है।








