पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया की अध्यक्षता में जिला कार्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण और पीसीपीएनडीटी एक्ट का कड़ाई से पालन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं का युक्तिकरण पर भी बल दिया। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे पर विस्तृत चर्चा करते हुए एक महत्वपूर्ण रणनीति साझा की। उन्होंने बताया कि जनपद की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जीआईएस द्वारा 16 अस्पतालों को विशेष नोडल अस्पताल के रूप में चिह्नित किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनपद के किसी भी दुर्गम क्षेत्र के मरीज को सामान्य एक्सरे,अल्ट्रासाउंड,डायग्नोस्टिक परीक्षण और सुरक्षित प्रसव जैसी अनिवार्य सेवाओं के लिए 30 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय न करनी पड़े। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ केवल जिला मुख्यालय तक सीमित न रहकर अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। चिकित्सा सुविधाओं को धरातल पर उतारने के लिए जिलाधिकारी ने बीरोंखाल,चेलूसैंण और घंडियाल जैसे केंद्रों में तत्काल एक्सरे सेवा शुरू करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पाबौ,बीरोंखाल,थलीसैंण,यमकेश्वर और सतपुली में रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए अल्ट्रासाउंड सेवाओं को अविलंब क्रियाशील करने के निर्देश दिए गए थे,जिसके क्रम में बीरोंखाल तथा सतपुली में साप्ताहिक अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जनता को इन सुविधाओं के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने पाबों तथा यमकेश्वर में भी साप्ताहिक सेवा तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रशासन की प्राथमिकता है कि जिले में की भी क्षेत्र असेवित न रहे तथा सभी को घर के नजदीक सुविधा मिले। बैठक के दौरान विगत छह माह में सरकारी अस्पतालों में प्रसव की कम संख्या पर जिलाधिकारी ने गहरा असंतोष और कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.शिव मोहन शुक्ला को सीधे निर्देश दिए कि स्वास्थ्य केंद्रों की प्रदर्शन रिपोर्ट तैयार की जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जो एलएमओ अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हैं या सक्रिय रूप से कार्य नहीं कर रही हैं,उनका तत्काल अन्यत्र स्थानांतरण किया जाए। जिलाधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि मातृत्व स्वास्थ्य और सुरक्षित प्रसव के लक्ष्य में किसी भी स्तर पर शिथिलता अक्षम्य होगी और इसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित एमओआईसी की होगी। जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करते हुए अब नैनीडांडा और रिखणीखाल में भी खुशियों की सवारी सेवा शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि इस सुविधा के माध्यम से अब इन क्षेत्रों की प्रसूताओं और नवजात शिशुओं को अस्पताल से घर तक सुरक्षित और निःशुल्क परिवहन सेवा उपलब्ध होगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दुर्गम अंचलों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा को सशक्त करना है। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशीलता और जवाबदेही पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि सभी गर्भवती महिलाओं की डिजिटल सूची तैयार की जाए और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से उन्हें संस्थागत प्रसव के लाभों के प्रति निरंतर जागरूक किया जाए। उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों की फील्ड में सक्रियता बढ़ाने के उद्देश्य से एलएमओ के लिए सप्ताह में एक दिन अनिवार्य रूप से गांवों का भ्रमण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए,ताकि ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य निगरानी बेहतर हो सके। इसके साथ ही,उन्होंने अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की बाधाओं को दूर करने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि पानी की किल्लत और तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाएगा,ताकि चिकित्सा कर्मियों को कार्य में सुगमता हो और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके। आपातकालीन सेवाओं की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने मरीजों के जीवन की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए गोल्डन ऑवर (आपातकाल के शुरुआती समय) में त्वरित उपचार सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि यदि किसी भी परिस्थिति में 108 एंबुलेंस अपने निर्धारित स्थान पर उपलब्ध नहीं है या पहुंचने में असमर्थ है,तो बिना समय गंवाए निकटतम विभागीय एंबुलेंस को तत्काल मौके पर भेजा जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि विभागीय एंबुलेंस का उपयोग करने पर मरीजों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा और यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क रहेगी,ताकि आर्थिक तंगी किसी के उपचार में बाधा न बने। उन्होंने बताया कि इस हेतु पृथक से धनराशि भी स्वीकृत की गई है। मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर किए जाने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी और जीवन-रक्षक बनाने के लिए जिलाधिकारी ने जिला रेफरल योजना के कड़ाई से अनुपालन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर रेफरल के दौरान सूचना के अभाव में गंतव्य अस्पताल तैयारी नहीं कर पाता,जिससे बहुमूल्य समय नष्ट होता है। इस समस्या के समाधान हेतु उन्होंने निर्देश दिए कि रेफरल के समय ही गंतव्य अस्पताल को पहले से सूचना दी जाए,ताकि मरीज के वहां पहुंचते ही संबंधित विशेषज्ञ और बेड पूरी तैयारी के साथ उपलब्ध रहें। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को स्पष्ट किया कि रेफरल केवल औपचारिकता न होकर एक व्यवस्थित जीवन-रक्षक कड़ी होनी चाहिए,जिसमें देरी की कोई गुंजाइश न हो। पीसीपीएनडीटी पर चर्चा करते हुए जिलाधिकारी ने जनपद में संचालित सभी अल्ट्रासाउंड और इमेजिंग केंद्रों की कड़ी निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लिंगानुपात में सुधार हेतु अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करना होगा और अधिनियम के उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए तत्काल कठोर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबों,यमकेश्वर और उत्तरा केयर हॉस्पिटल के नवीन पंजीकरण के साथ ही मंसा मैटरनिटी सेंटर कोटद्वार को पुरानी मशीन के बदले नई अल्ट्रासाउंड मशीन क्रय करने की अनुमति प्रदान की गई। बैठक के अंत में टेलीमेडिसिन (ई-संजीवनी) और डायग्नोस्टिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने सभी एमओआईसी को आगाह किया कि वे अपने क्षेत्र की स्वास्थ्य गतिविधियों के लिए सीधे उत्तरदायी होंगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.शिव मोहन शुक्ला ने आश्वस्त करते हुए कहा कि विभाग स्वास्थ्य सेवाओं के युक्तिकरण और जन-सुलभ उपचार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में समस्त स्वास्थ्य केंद्रों की प्रदर्शन रिपोर्ट नियमित रूप से तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए रोस्टर प्रणाली को और प्रभावी बनाया जा रहा है तथा एंबुलेंस व रेफरल सेवाओं की निगरानी स्वयं उनके स्तर से की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीज को त्वरित लाभ मिले। बैठक में एसीएमओ डॉ.पारुल गोयल,डॉ.विनय त्यागी,सीएमएस पौड़ी डॉ.एल.डी.सेमवाल,कोटद्वार डॉ.विजय कुमार,डॉ.हितेन जंगपांगी,डॉ.रुचि कुमारी सहित सभी एमओआईसी भी उपस्थित रहे।








