श्रीनगर गढ़वाल। पौड़ी जनपद के श्रीनगर में भाजपा ओबीसी मोर्चा द्वारा महान समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की जयंती श्रद्धा,उत्साह और सामाजिक जागरूकता के वातावरण में मनाई गई। यह कार्यक्रम कमलेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित हुआ,जहां बड़ी संख्या में मोर्चा के पदाधिकारी,कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री गणेश भट्ट मौजूद रहे,जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता ओबीसी मोर्चा के जिला अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने की। आयोजन के दौरान वक्ताओं ने महात्मा फुले के जीवन,उनके संघर्ष और समाज सुधार में उनके ऐतिहासिक योगदान को विस्तार से याद किया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में जगमोहन सिंह नेगी ने कहा कि महात्मा फुले केवल एक समाज सुधारक नहीं,बल्कि सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के कटगुण गांव में जन्मे फुले ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने का बीड़ा उठाया और महिलाओं,दलितों,पिछड़े वर्गों तथा किसानों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने विशेष रूप से सावित्री बाई फुले के साथ उनके ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1848 में दोनों ने मिलकर लड़कियों के लिए पहला विद्यालय प्रारंभ किया,जो उस समय एक क्रांतिकारी पहल थी। मुख्य वक्ता गणेश भट्ट ने अपने उद्बोधन में कहा कि महात्मा फुले ने बाल विवाह का विरोध किया,विधवा विवाह का समर्थन किया तथा समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ मजबूत आवाज उठाई। उन्होंने वर्ष 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना कर सामाजिक न्याय और समानता का संदेश पूरे देश में फैलाया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि महात्मा फुले का मानना था कि शिक्षा ही समाज को सशक्त और समतामूलक बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर नगर निगम पार्षद मीना असवाल,ओबीसी मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष उमा गुनसोला,जिला महामंत्री राजेश्वरी पुरी,जिला कोषाध्यक्ष जितेंद्र पुरी,शशि पंवार,सरला पवार,हंसा पंवार,हरीश पंवार,सोनी कौर सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने महात्मा फुले के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल एक जयंती समारोह रहा,बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम भी बना,जिसने महात्मा फुले के विचारों को नई पीढ़ी तक प्रभावशाली ढंग से पहुंचाया।








