श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर नगर निगम क्षेत्र में अंतिम संस्कार व्यवस्था को लेकर एक गंभीर और जनहित से जुड़ा मुद्दा सामने आया है। स्थानीय व्यापारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता कुशलानाथ द्वारा महापौर को भेजे गए एक पत्र में श्मशान घाटों पर लकड़ी की लगातार हो रही कमी और उससे उत्पन्न हो रही समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है। पत्र में बताया गया है कि नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आधा दर्जन से अधिक श्मशान घाट संचालित हैं,जहां प्रतिदिन अंतिम संस्कार के लिए बड़ी मात्रा में लकड़ी की आवश्यकता होती है। लेकिन मौजूदा हालात में पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण सूखी लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो पा रही है,जिससे आमजन को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही श्रीनगर स्थित मेडिकल कॉलेज बेस चिकित्सालय एवं संयुक्त उप जिला अस्पताल में उपचार के दौरान होने वाली मौतों के बाद भी अधिकांश परिवार इन्हीं श्मशान घाटों का उपयोग करते हैं,जिससे लकड़ी की मांग और अधिक बढ़ जाती है। कई मामलों में डैम क्षेत्र से मिलने वाले लावारिस शवों का भी अंतिम संस्कार इन्हीं घाटों पर किया जाता है,जहां अच्छी गुणवत्ता की लकड़ी का होना अत्यंत आवश्यक है। कुशलानाथ ने अपने पत्र में धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करते हुए कहा कि सनातन एवं हिंदू धर्म में विधिवत शवदाह संस्कार अत्यंत महत्वपूर्ण होता है,जिससे मृत आत्मा की शांति सुनिश्चित होती है। ऐसे में लकड़ी की कमी न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है,बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी प्रभावित करती है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्होंने एक दूरदर्शी और आधुनिक समाधान भी सुझाया है। उन्होंने नगर निगम से मांग की है कि लकड़ी पर निर्भरता कम करने के लिए विद्युत शवदाह गृह (इलेक्ट्रिक क्रेमेशन) की स्थापना की जाए। उनका कहना है कि इलेक्ट्रिक शवदाह गृह न केवल पर्यावरण के अनुकूल होंगे,बल्कि इससे धुएं में कमी आएगी और लकड़ी की खपत भी घटेगी। उन्होंने सुझाव दिया कि श्रीनगर नगर निगम को कम से कम दो आधुनिक इलेक्ट्रिक श्मशान घाट स्थापित करने के लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जब तक विद्युत व्यवस्था पूरी तरह से सुचारु नहीं होती,तब तक लकड़ी की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। अंत में कुशलानाथ ने महापौर से जनहित में इस मुद्दे पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है,ताकि श्मशान घाटों पर लकड़ी की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके और आमजन को सम्मानजनक अंतिम संस्कार की सुविधा मिल सके। श्रीनगर में अंतिम संस्कार व्यवस्था को लेकर उठी यह मांग केवल एक समस्या नहीं बल्कि आधुनिकता,पर्यावरण संरक्षण और मानवीय गरिमा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बन चुकी है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन इस दिशा में कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाता







