श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पहचान केवल उसके हिमालय,नदियों और मंदिरों तक सीमित नहीं है,बल्कि उन लोकदेव परंपराओं में निहित है,जो पीढ़ियों से गांव-गांव में आस्था,संस्कृति और सामाजिक एकता को जीवंत बनाए हुए हैं। यहां देवी-देवताओं की पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं,बल्कि प्रकृति,समाज और जीवन के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व का भाव है। ऐसी ही पावन परंपराओं की एक अनुपम झलक जनपद पौड़ी गढ़वाल के ग्राम सरणा में देखने को मिली। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड खिर्सू अंतर्गत चलणस्यूं पट्टी के ग्राम सरणा में ग्राम रक्षक एवं लोकदेवता भूमियाल देवता का विधिवत पूजन अत्यंत श्रद्धा,भक्ति और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। देवभूमि उत्तराखंड की प्राचीन धार्मिक,सांस्कृतिक एवं सामाजिक परंपराओं को जीवंत करता यह पावन आयोजन पूरे गांव के लिए आस्था और एकता का पर्व बन गया। सुबह से ही ग्रामवासी पारंपरिक वेशभूषा में एकत्रित हुए। वैदिक मंत्रोच्चार,धूप-दीप, नैवेद्य और लोकरीति के अनुरूप भूमियाल देवता की पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर ग्रामीणों ने ग्राम,क्षेत्र एवं जनपद की सुख-समृद्धि,खुशहाली,शांति और रक्षा की कामना करते हुए देवता से आशीर्वाद मांगा। मान्यता है कि भूमियाल देवता ग्राम की सीमाओं,खेत-खलिहानों तथा जनजीवन की रक्षा करते हैं। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं,बल्कि सामाजिक समरसता,आपसी भाईचारे और सामूहिक सहभागिता का भी उत्कृष्ट उदाहरण बना। गांव के बुजुर्गों,युवाओं और बच्चों की समान भागीदारी ने लोक-संस्कृति की मजबूती और सामाजिक एकता को और अधिक सुदृढ़ किया। पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में ग्राम सरणा के ग्रामीणों का सामूहिक योगदान सराहनीय रहा। मनवर सिंह भण्डारी,अमर सिंह भण्डारी,पंकज सिंह भण्डारी,अनंत सिंह भण्डारी,हरेंद्र सिंह भण्डारी,गजपाल सिंह भण्डारी,नवीन भण्डारी,रविन्द्र सिंह खत्री,वृजमोहन सिंह रावत,राजपाल सिंह भण्डारी सहित अन्य ग्रामीणों ने रोट-प्रसाद निर्माण एवं भंडारे की व्यवस्था में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। पूजन उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने भूमियाल देवता का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर बच्चों के लिए विशेष रूप से भंडारे की सुंदर व्यवस्था की गई,जिससे गांव में उत्सव और प्रसन्नता का वातावरण बना रहा। सरणा गांव की शान एवं खिर्सू ब्लॉक प्रमुख अनिल भण्डारी ने भूमियाल देवता पूजन कार्यक्रम के दौरान कहा देवभूमि उत्तराखंड की पहचान हमारी लोकदेव परंपराओं से है। भूमियाल देवता की आराधना हमें प्रकृति,संस्कृति और समाज के प्रति हमारे दायित्वों का बोध कराती है। ऐसी धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराएं गांवों में एकता,सहयोग और सद्भाव को सुदृढ़ करती हैं। मैं देवता से प्रार्थना करता हूं कि ग्राम सरणा सहित समस्त क्षेत्र को सुख,शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त हो। ग्राम सरणा में आयोजित यह पावन पूजन कार्यक्रम यह स्पष्ट संदेश देता है कि देवभूमि उत्तराखंड में लोक-देवताओं की पूजा हमारी आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना की एक सशक्त धरोहर है,जो समाज को जोड़ने,संस्कारों को सहेजने और भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती है।








