ऑनलाइन खरीदारी की चमक से फीकी पड़ रही मसूरी के बाजारों की रौनक, स्थानीय कारोबार पर बढ़ रहा दबाव

 

मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने त्योहारी सीजन में स्थानीय दुकानों से खरीदारी की अपील की

मसूरी। ऑनलाइन खरीदारी की बढ़ती लोकप्रियता ने जहां उपभोक्ताओं को घर बैठे सामान मंगाने की सुविधा दी है, वहीं इसका असर अब पहाड़ों की रानी मसूरी के पारंपरिक बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के भारी डिस्काउंट, कैशबैक और आकर्षक ऑफरों के बीच स्थानीय दुकानदारों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होता जा रहा है। इसका असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय रोजगार, छोटे कारोबारियों की आजीविका और बाजारों की रौनक पर भी पड़ रहा है। मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि ऑनलाइन खरीदारी की बढ़ती लत से स्थानीय किराना दुकानदारों, कपड़ा व्यापारियों, इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारियों और फुटकर विक्रेताओं का कारोबार प्रभावित हो रहा है। बड़ी कंपनियां भारी छूट और कैशबैक देकर ग्राहकों को आकर्षित करती हैं, जबकि छोटे दुकानदारों के पास इस तरह के ऑफर देने की क्षमता नहीं होती। ऐसे में स्थानीय व्यापारियों के सामने कारोबार बचाने की चुनौती खड़ी हो रही है। रजत अग्रवाल ने कहा कि स्थानीय बाजार केवल सामान खरीदने-बेचने की जगह नहीं हैं, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। स्थानीय दुकानों से होने वाली खरीदारी का पैसा शहर के भीतर ही घूमता है। इससे दुकानदारों के साथ उनके कर्मचारियों, सप्लायरों और दूसरे छोटे कारोबारियों को भी रोजगार मिलता है। इसके उलट, ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने से स्थानीय बाजारों में नकदी का प्रवाह प्रभावित होता है और छोटे व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि त्योहारों और शादी-विवाह के सीजन में बाजारों की रौनक स्थानीय व्यापार से ही बनती है। यदि लोग लगातार ऑनलाइन खरीदारी की ओर बढ़ते रहे तो इसका असर बाजारों की चहल-पहल और उनसे जुड़े रोजगार पर भी पड़ेगा। एसोसिएशन अध्यक्ष ने सरकार से ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए प्रभावी नियम बनाने की मांग की। उनका कहना है कि ऑनलाइन कंपनियों की ओर से दिए जाने वाले भारी डिस्काउंट और कैशबैक की व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए। डिस्काउंट की सीमा तय करने और स्थानीय विक्रेताओं को समान अवसर देने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि छोटे दुकानदार भी प्रतिस्पर्धा में टिक सकें। रजत अग्रवाल ने आम लोगों से भी अपील की कि वोकल फॉर लोकल का संदेश केवल सोशल मीडिया तक सीमित न रखें, बल्कि अपनी खरीदारी में भी स्थानीय दुकानदारों को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि इस त्योहारी और शादी-विवाह के सीजन में लोग मसूरी के बाजारों से खरीदारी करें, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार को सहारा मिल सके।उन्होंने जोर दिया कि स्थानीय दुकानदार केवल सामान बेचने वाला नहीं, बल्कि शहर की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा है। संकट या जरूरत के समय स्थानीय बाजार और दुकानदार ही लोगों के बीच मौजूद रहते हैं। ऐसे में स्थानीय बाजारों को बचाने की जिम्मेदारी व्यापारियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं की भी है।