श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा पर एक बार फिर आस्था,परंपरा और संस्कृति का विराट संगम देखने को मिलेगा। विकास खंड खिर्सू के अंतर्गत स्थित प्राचीन एवं सिद्धपीठ मां भगवती गौरा देवी मंदिर देवलगढ़ में आगामी 14 अप्रैल 2026 को बैसाखी मेला अत्यंत धूमधाम और श्रद्धा के साथ आयोजित किया जाएगा। यह ऐतिहासिक मेला सैकड़ों वर्षों से निरंतर परंपरा के रूप में मनाया जाता रहा है,जो आज भी अपनी सांस्कृतिक गरिमा और धार्मिक महत्व को अक्षुण्ण बनाए हुए है। इस मेले की सबसे विशेष और आकर्षण का केंद्र झूला मेला है,जिसमें मां भगवती गौरा को उनके गर्भगृह से बाहर निकालकर भक्तों को दर्शन दिए जाते हैं। इस दौरान विधिवत पूजा-अर्चना के साथ मां का झूला झुलाया जाता है,जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावनात्मक और अलौकिक क्षण होता है। मंदिर समिति के अनुसार अपराह्न 3.30 बजे मां गौरा का झूला झुलाया जाएगा,जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु देवलगढ़ पहुंचेंगे। धार्मिक परंपरा के अनुसार मां की शोभायात्रा में क्षेत्रपाल देवता श्री काल भैरव का निशान अग्रिम रूप से चलता है,जो इस आयोजन को और भी दिव्य बना देता है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्र सुमाड़ी,भैसकोट,सुरालगांव,स्वीत सहित कई गांवों से श्रद्धालु अपने पारंपरिक वाद्ययंत्र ढोल-दमाऊं के साथ संकीर्तन करते हुए मां के दरबार में पहुंचेंगे,जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो जाएगा। मेले से एक दिन पूर्व 13 अप्रैल की रात्रि को श्रीनगर की प्रसिद्ध श्रीयंत्र भजन मंडली द्वारा भव्य रात्रि जागरण का आयोजन किया जाएगा। इस जागरण में स्थानीय श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग लेकर मां भगवती गौरा की भक्ति में लीन होंगे और पूरी रात भजन-कीर्तन का आनंद लेंगे। मंदिर समिति ने जानकारी दी कि बैसाखी मेले के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है,जिसकी व्यवस्था श्रीनगर विधानसभा के विधायक एवं उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत द्वारा की जा रही है। इस पावन अवसर पर डॉ.रावत द्वारा मां के दरबार में 51 कन्याओं का पूजन भी किया जाएगा,जो भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है। मेले की व्यवस्थाओं को लेकर 7 अप्रैल 2026 को मंदिर समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई,जिसमें क्षेत्र के भक्तगण जे.पी.काला,सुधीर बहुगुणा,मंगल सिंह,कुलदीप चौहान,देवेन्द्र भण्डारी,पुष्कर सिंह चौहान,मनीष कपरूवाण और यमुना प्रसाद काला सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे और आयोजन को सफल बनाने के लिए विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई। देवलगढ़ का बैसाखी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध परंपरा,लोकसंस्कृति और अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी यह मेला श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक एकता का संदेश लेकर आएगा।








