- नाले की भूमि कब्जाकर किया जा रहा था अवैध निर्माण
- शिकायत मिलने के बाद महापौर ने लिया त्वरित एक्शन
रुद्रपुर। महापौर विकास शर्मा के निर्देश पर नगर निगम की टीम ने वार्ड संख्या 18, खेड़ा बस्ती में नाले के समीप किए गए अवैध अतिक्रमण को सख्ती के साथ हटा दिया। निगम की इस औचक कार्रवाई से अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया है। टीम ने न केवल मौके पर किए गए अवैध निर्माण को हटाया, बल्कि वहां मौजूद निर्माण सामग्री को भी अपने कब्जे में लेकर जब्त कर लिया।
मामला वार्ड नंबर 18 के खेड़ा बस्ती क्षेत्र का है, जहाँ अब्बास और अज्जू मियां नामक दो भाइयों द्वारा सार्वजनिक नाले की सरकारी जमीन को अपनी जागीर समझने की शिकायत महापौर को प्राप्त हुई थी। लिखित शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि इन दोनों भाइयों ने सरकारी दीवार को क्षतिग्रस्त कर न केवल वहां अवैध रूप से गेट लगा लिया है, बल्कि वे उस सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त करने की भी फिराक में थे। जैसे ही यह मामला महापौर के संज्ञान में आया, उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए निगम प्रशासन को तत्काल और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश जारी किए।
महापौर के आदेश पर नगर निगम की टीम दलबल के साथ मौके पर पहुँची। स्थलीय निरीक्षण के दौरान शिकायत के तथ्य सही पाए गए। टीम ने देखा कि सरकारी जमीन को घेरकर वहां अवैध निर्माण कार्य चल रहा था। निगम कर्मियों ने बिना समय गंवाए अतिक्रमण को हटा दिया और निर्माण के लिए प्रयुक्त किए जा रहे सामान को जब्त कर सरकारी वाहन में लदवा दिया। कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों को दो-टूक लहजे में चेतावनी दी गई कि यदि भविष्य में पुनः इस स्थान पर सिर उठाने की कोशिश की गई, तो उनके विरुद्ध कठोर कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
इस कार्रवाई के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए महापौर ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा निगम की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा सरकारी भूमि जनता की संपत्ति है और इस पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अतिक्रमणकारी चाहे कितना भी रसूखदार या प्रभावशाली क्यों न हो, कानून सबके लिए बराबर है। हमने पूरे शहर के वार्डों के विस्तृत सर्वे का निर्णय लिया है। जहां-जहां सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे मिलेंगे, वहां बुलडोजर चलना तय है। महापौर ने कहा कि नगर निगम अतिक्रमण मुक्त शहर के संकल्प पर काम कर रहा है और आने वाले दिनों में यह अभियान और अधिक व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा, ताकि सरकारी जमीनों को खुर्द-बुर्द होने से बचाया जा सके।







