कीर्तिनगर/टिहरी गढ़वाल। सरकार की महत्वाकांक्षी पहल जन-जन की सरकार,जन-जन के द्वार कार्यक्रम के तहत आज राजकीय इंटर कॉलेज धारी ढूंढसिर में आयोजित शिविर उस समय सवालों के घेरे में आ गया,जब जिला स्तरीय अधिकारियों की अनुपस्थिति पर जनप्रतिनिधियों ने खुलकर नाराजगी जाहिर की। कार्यक्रम की अध्यक्षता उप जिलाधिकारी कीर्तिनगर मंजू राजपूत ने की,जबकि मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत सदस्य खोला कड़ाकोट कविता देवी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं जल संस्थान देवप्रयाग के अधिशासी अभियंता नरेश पाल सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविर के दौरान कुल 33 शिकायतें दर्ज की गई,जिन्हें संबंधित विभागों को निस्तारण हेतु अग्रसारित किया गया है। हालांकि जनप्रतिनिधियों का कहना था कि वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण समस्याओं के मौके पर समाधान की अपेक्षा पूरी नहीं हो सकी। उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम मूल रूप से मुख्य विकास अधिकारी टिहरी वरुणा अग्रवाल की अध्यक्षता में प्रस्तावित था,लेकिन उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के जनपद टिहरी भ्रमण कार्यक्रम के चलते वे वर्चुअल माध्यम से भी शिविर में शामिल नहीं हो पाए। इससे कार्यक्रम की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र पंचायत सदस्य पारकोट चंद्रमोहन चौहान ने जिला स्तरीय अधिकारियों की गैरहाजिरी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि जन-जन की सरकार,जन-जन के द्वार जैसी योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारी शिविरों में उपस्थित ही नहीं होते,तो आम जनता की जटिल समस्याओं का समाधान कैसे संभव होगा। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि शिविर में लोक निर्माण विभाग कीर्तिनगर के अधिशासी अभियंता तथा जिला उद्यान अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण सड़क,भवन,बागवानी एवं संबंधित योजनाओं से जुड़ी समस्याओं पर कोई ठोस चर्चा नहीं हो सकी। इससे ग्रामीणों को निराश होकर लौटना पड़ा। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जिला स्तरीय अधिकारियों की लगातार अनुपस्थिति से न केवल जनता परेशान है,बल्कि सरकार की मंशा और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि भविष्य में ऐसे जनसुनवाई एवं समाधान शिविरों में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए,ताकि जनसमस्याओं का मौके पर ही समाधान हो और जनता को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। कार्यक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि योजनाओं की सफलता केवल घोषणाओं से नहीं,बल्कि जमीनी स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।








