जनपद पौड़ी गढ़वाल में समलौण आंदोलन पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक,सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों को नई दिशा दे रहा है। जीवन के हर महत्वपूर्ण अवसर को प्रकृति से जोड़ने की यह अनूठी पहल अब जनआंदोलन का स्वरूप ले चुकी है। निर्विरोध निर्वाचन की खुशी हो या विवाह जैसे मांगलिक संस्कार-हर अवसर पर समलौण पौधरोपण समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का सशक्त माध्यम बन रहा है। निर्विरोध चयन की खुशी में समलौण पौधरोपण विकास खण्ड पाबों पट्टी बाली कण्डारस्यूं के ग्राम सैंजी में क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में गीता देवी भण्डारी के निर्विरोध चयन होने पर गांव में उत्सव का माहौल रहा। इस अवसर पर गांव की ओर से आयोजित भजन-कीर्तन कार्यक्रम के साथ-साथ खुशी के इन पलों को स्थायी स्मृति देने के लिए घड़ियाल देवता मंदिर परिसर में मौसमी का समलौण पौधा रोपा गया। इस कार्यक्रम का आयोजन गांव की समलौण सेना द्वारा किया गया। पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी प्रदीप सिंह साहू ने ली। कार्यक्रम का संचालन समलौण सेना की नायिका गीता देवी भण्डारी ने किया। उन्होंने कहा कि यह पौधा गांव की खुशहाली,समृद्धि और एकता का प्रतीक है। उन्होंने यह भी संदेश दिया कि भविष्य में भी चुनाव निर्विरोध हों और समाज में आपसी सौहार्द बना रहे। इस अवसर पर गांव की समलौण सेना की सदस्य बबली देवी भण्डारी,कांति देवी भण्डारी,विनीता देवी भण्डारी,गोदावरी देवी भण्डारी,सुमन देवी,शशि देवी,विधि देवी,रामी देवी,अनीता देवी सहित संपूर्ण ग्रामवासी उपस्थित रहे। गीता देवी भण्डारी ने समलौण सेना को 500 रुपए की नगद राशि पुरस्कार स्वरूप भेंट कर इस पुण्य कार्य को प्रोत्साहित किया। विवाह संस्कार को प्रकृति से जोड़ने की प्रेरक पहल वहीं विकास खण्ड पौड़ी पट्टी पैडुलस्यूं के ग्राम कमेड़ा में हाल निवासी दिल्ली गणेश चन्द्र थपलियाल की बिटिया के विवाह के उपरांत नवदम्पति अभिषेक एवं स्वीटी ने अपने घर के आंगन में अमरूद का समलौण पौधा रोपकर विवाह को स्मरणीय बनाया। पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी स्वीटी की माता मंजू देवी ने ली। कार्यक्रम का संचालन समलौण आंदोलन की राज्य संयोजिका सावित्री देवी ममगाईं ने किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मां अपनी संतान का पालन-पोषण करती है,उसी प्रकार इस पौधे का संरक्षण भी मां द्वारा किया जाएगा। यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं,बल्कि संवेदनाओं,संस्कारों और संस्कृति को प्रकृति से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से वनों को आग से बचाने,वन्यजीव संरक्षण तथा प्रत्येक संस्कार और शुभ अवसर पर समलौण पौधरोपण करने की अपील की। कार्यक्रम में गांव की समलौण सेना की सदस्य लक्ष्मी देवी,कृष्णा देवी,सपना,बीना देवी,सुमन,सरल,आनंदी,सुनीता,विधाता,कुसुम,आरती सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। समलौण-पर्यावरण संरक्षण से आगे एक सामाजिक आंदोलन समलौण आंदोलन आज केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं रहा,बल्कि यह रीति-रिवाज,परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का रूप ले चुका है। जीवन के हर संस्कार को प्रकृति से जोड़ने की यह पहल न केवल वर्तमान पीढ़ी,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है। पौड़ी गढ़वाल में समलौण अब हर खुशी को हरियाली में बदलने का संकल्प बन चुका है।








