पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों और सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आज 5 जनवरी 2026 को कोतवाली पौड़ी परिसर में ग्राम प्रहरियों के साथ एक विशेष जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य ग्राम स्तर पर कानून-व्यवस्था को मजबूत करना तथा ग्राम प्रहरियों को पुलिस के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर अपराध रोकथाम में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना रहा। गोष्ठी के दौरान उपस्थित ग्राम प्रहरियों एवं अन्य प्रतिभागियों को सामाजिक माध्यमों के माध्यम से होने वाले साइबर अपराधों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें फेसबुक,इंस्टाग्राम,एक्स (पूर्व में ट्विटर) और व्हाट्सएप के जरिये की जाने वाली ऑनलाइन ठगी,बैंक धोखाधड़ी,ब्लैकमेलिंग,पहचान की चोरी एवं तथाकथित डिजिटल गिरफ्तारी जैसे गंभीर अपराधों के तरीकों को सरल भाषा में समझाया गया। पुलिस अधिकारियों द्वारा बताया गया कि साइबर अपराधी आमजन की अनभिज्ञता का लाभ उठाकर झूठे संदेश,फर्जी कॉल और लिंक के माध्यम से लोगों को ठगने का प्रयास करते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान कॉल,संदेश या लिंक पर विश्वास न करने और तुरंत पुलिस को सूचित करने की अपील की गई। ग्राम प्रहरियों से आग्रह किया गया कि वे अपने-अपने गांवों में जाकर ग्रामीणों को इन अपराधों के प्रति जागरूक करें। गोष्ठी में उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय साइबर अपराध सहायता संख्या 1930,आपातकालीन सेवा 112,नशा उन्मूलन सहायता संख्या 1933,उत्तराखण्ड पुलिस मोबाइल अनुप्रयोग,गौरा शक्ति अनुप्रयोग तथा दूरसंचार उपकरण पहचान पंजीकरण (सीईआईआर) पोर्टल की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि इन माध्यमों से साइबर अपराध,खोए हुए मोबाइल फोन,महिला सुरक्षा एवं अन्य आपात स्थितियों में त्वरित सहायता प्राप्त की जा सकती है। ग्राम प्रहरियों से की गई अपील पुलिस अधिकारियों ने ग्राम प्रहरियों से अपील की कि वे पुलिस और जनता के बीच सेतु बनकर कार्य करें,संदिग्ध गतिविधियों की समय रहते सूचना दें तथा गांव स्तर पर नशा,साइबर अपराध और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जन-जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाएं। यह जागरूकता गोष्ठी ग्राम स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सराहनीय पहल मानी जा रही है।








