श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड में स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आज दिनांक 19 दिसम्बर 2025 को केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र सशस्त्र सीमा बल श्रीनगर एवं मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी तथा जिला मत्स्य प्रभारी पौड़ी गढ़वाल के मध्य एक महत्वपूर्ण सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह सहमति ज्ञापन उप महानिरीक्षक सुभाष चंद नेगी के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में संपन्न हुआ। इस अवसर को वायब्रेंट योजना के अंतर्गत एक दूरदर्शी कदम के रूप में देखा जा रहा है,जिससे स्थानीय उत्पादन और संस्थागत उपभोग के बीच सीधा एवं स्थायी सेतु स्थापित होगा। सहमति ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य सशस्त्र सीमा बल के केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र श्रीनगर गढ़वाल के लिए स्थानीय स्तर पर उत्पादित भेड़,बकरी,पोल्ट्री एवं मछली जैसे खाद्य उत्पादों की नियमित,ताजा एवं गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके माध्यम से प्रशिक्षण केंद्र को उच्च गुणवत्ता वाले पोषणयुक्त खाद्य पदार्थ प्राप्त होंगे,वहीं दूसरी ओर स्थानीय पशुपालकों,मत्स्य पालकों एवं कृषक उत्पादकों को सुनिश्चित बाजार उपलब्ध होगा। यह पहल न केवल ग्रामीण आजीविका सृजन को बढ़ावा देगी,बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सहमति ज्ञापन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इससे बिचौलियों की भूमिका न्यूनतम होगी और उत्पादकों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा। साथ ही यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान की भावना को साकार करने के साथ-साथ वायब्रेंट योजना के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। स्थानीय संसाधनों के उपयोग से न केवल परिवहन लागत में कमी आएगी,बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को भी बल मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में इस सहयोग को और अधिक व्यापक स्वरूप दिया जाएगा,ताकि अन्य स्थानीय उत्पादों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जा सके। अधिकारियों ने इसे सुरक्षा बलों और नागरिक तंत्र के बीच सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। निस्संदेह,यह सहमति ज्ञापन स्थानीय विकास,संस्थागत आवश्यकताओं की पूर्ति और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।








