उधम सिंह नगर जनपद मुख्यालय रुद्रपुर निवासी साहिल ने महज तीस साल की उम्र में उत्तराखंड का नाम विदेश में रोशन कर दिया हैं। साहिल यूनाइटेड नेशन के IIMSAM के राजदूत बने है। इससे पहले वो 27 साल की उम्र में स्टेट ऑफ अफ्रीकन डाय स्पोरा के प्रधानमंत्री डॉ. लुइस जॉर्ज टिन के सलाहकार बने थे यूनाइटेड नेशन में राजदूत बनने वाले साहिल पहले भारतीय है।जिसके बाद से उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. साहिल की इस उपलब्धि पर क्षेत्र में खुशी की लहर है।साहिल इससे पहले मॉडल यूनाइटेड नेशन के डेलीगेट रह चुके हैं. साहिल के पिता सेवा सिंह निर्माण कार्यों के ठेकेदार है उनकी माता का कोरोना के चलते अप्रैल में निधन हो गया था. वर्तमान में उनका परिवार ग्रीन पार्क में रहता है. साहिल खुद दिल्ली में रहते है।यूनाइटेड नेशन के राजदूत बनने के बाद शहरवासियों में खुशी का माहौल है।साहिल का कहना है कि स्टेट ऑफ अफ्रीकन डाय स्पोरा देश से प्रोटोकॉल मिलने के बाद उन्होंने भारत और स्टेट ऑफ अफ्रीकन डायस्पोरा के बीच मधुर संबंध बनाए थे और दोनों देशों के बीच उद्योगों के बढ़ाने के साथ ही बैंकिंग और शिक्षा के क्षेत्र में काम किया था।उनका कहना है की यूनाइटेड नेशन का राजदूत बनने के बाद विदेश के कई गरीब देशों के बीच कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए काम करेंगे।उन्होंने कहा इस समय कुपोषण की सबसे बड़ी समस्या अफ्रीकन देश में है जिसके लिए वो विश्व के विकसित देशों के साथ समन्वय बना कर काम करने का प्रयास कर रहे है साहिल ने कहा वो भारत में भी इस समस्या को दूर करने के लिए यूनाइटेड नेशन पहले भी काम कर चुकी है जिसके अंतर्गत सन 2020 में फिल्म अभिनेता संजय दत्त के साथ मिल कर कुपोषित बच्चो को एक मिलियन स्पिरुलिना बाटने का काम किया था IIMSAM सन 2001 से यूनाइटेड नेशन मैं आर्टिकल 102ऑफ यूनाइटेड नेशन चार्ट के तहत काम काम किया है।
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